जवानी पर चढ़ गयी है सर्दियां
रात की ठिठुरन से बचने, भूल सब शिकवे ,गिले
शाम ,डर कर,उलटे पैरों,दोपहर से जा मिले
ओढ़ ले कोहरे की चादर ,धूप ,तज अपनी अकड़
छटपटाये चमकने को ,सूर्य पीला जाये पड़
हवायें जब कंपकंपाये ,निकलना मुश्किल करे
चूमने को चाय प्याला ,बारहां जब दिल करे
जेब से ना हाथ निकले ,दिखाये कन्जूसियाँ
पास में बैठे रहे बस ,लगे मन भाने पिया
लिपट तन से जब रजाई ,दिखाये हमदर्दियाँ
तो समझ लो ,जवानी पर,चढ़ गयी है सर्दियाँ
घोटू
समाजवाद: प्रयोग और पतन
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कल शाम 11 मार्च को राजकीय पुस्तकालय, वाराणसी में प्रो. इंदीवर जी की पुस्तक
'समाजवाद: प्रयोग और पतन' का भव्य लोकार्पण हुआ। समारोह में अध्यक्ष: प्रो
दीपक...
2 घंटे पहले
सीत ऋतु के सीतल कन..,
जवाब देंहटाएंनव यौवन आरोह..,
रैनि रैनि रज सित किरन..,
तरंगन रँगन लोह.....