नशा -बुढ़ापे का
आदमी पर जब नशा छाता है
वो ठीक से चल भी नहीं सकता ,
डगमगाता है
उसे कुछ भी याद नहीं रहता ,
सब कुछ भूल जाता है
मेरी माँ भी ठीक से चल नहीं सकती ,
डगमगाती है
और मिनिट मिनिट में ,
सारी बातें भूल जाती है ,
नशे के सारे निशां उसमे नज़र आते है,
उमर नब्बे की में भी ऐसा भला होता है
मुझे तो ऐसा कुछ लगता है कि मेरे यारों ,
बुढापे का भी कोई ,अपना नशा होता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
वसीयत अनुकम्पा नियुक्ति का आधार नहीं-इलाहाबाद हाईकोर्ट
-
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मृत सरकारी
कर्मचारी की वसीयत (विल) के आधार पर नहीं दिया जा सकता।
हाइकोर्ट ने कहा कि
*उत्...
1 दिन पहले
बहुत ही सुन्दर पद,आभार.
जवाब देंहटाएंहर उम्र का अपना एक नशा होता है ...
जवाब देंहटाएंबेहतरीन ...