बहुत तुम जुल्म ढाती हो
जो बोसा लूं,चुभे खंजर,
लूं चुम्बन काट खाती हो
जो मै लूं हाथ हाथों में,
मुझे नाख़ून चुभाती हो
जो फेरूँ हाथ जुल्फों पर ,
तो हेयरपिन मुझे चुभते,
बहुत तुम जुल्म ढाती हो,
जब मेरे पास आती हो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग तीस (30)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग तीस (30)भाग 30 अंशुमन दीपावली के बाद मेहमान
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3 घंटे पहले
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