घोटू के पद
मन,तू ,क्यों कूतर सा भागे
मन तू,क्यों कूतर सा भागे
मै तेरे पीछे दौडत हूँ,और तू आगे आगे
भोर भये तू शोर मचावत ,घर की देहरी लांघे
तेरी डोर ,हाथ मेरे पर, सधे नहीं तू साधे
इत उत सूँघत ,पीर निवारे,इधर उधर भटकाके
रहत सदा चोकन्ना पर तू,रखे मोहे उलझाके
'घोटू'स्वामिभक्त कहाये,निस दिन नाच नचाके
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सबके दिल की गहराई में
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सबके दिल की गहराई में इक भूमि की गोद में उगते नीम और आमों के तरुवर, दोनों
जीवन को संजोये इक कटु, दूजा मृदु रस भरकर !सबके दिल की गहराई में जीवन का इक
अंश छि...
1 दिन पहले
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