सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1497
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*जन्मों का गठबंधन **/ अनिता ललित*
*बोली मुस्कान, आँसू से,*
*एक दिन आकर** -*
*क्यों आते हो तुम -अँखियों में भर**-**भर**?*
*होकर के मजबूर**, **मैं ...
1 घंटे पहले
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