सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मंज़िल और रास्ते
-
मंज़िल और रास्ते जिसने जाना, जो भी जाना वह कहा नहीं जा सकता जो कहा गया
है वह मार्ग की खबर देता है मंज़िल की नहीं वहाँ तो ख़ुद ही जाना होता है कोई
चल सकता ह...
10 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।