सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
आँगन में उतरा हो जैसे
-
आँगन में उतरा हो जैसेसाँझ-सवेरे जब उपवन में, पंछी गाये पीहू-पीहू आँगन में
उतरा हो जैसे, फूला, खिला बोहाग बीहू !आया बसंत, हर मन उत्सुक, स्पंदित होकर
जागी ध...
3 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।