सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग तीस (30)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग तीस (30)भाग 30 अंशुमन दीपावली के बाद मेहमान
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3 घंटे पहले
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