मूंछों की बैलेंसिंग : एक राष्ट्रीय समस्या
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मूंछों की बैलेंसिंग : एक राष्ट्रीय समस्या➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖✍️ डॉ. डंडा
लखनवी➖➖➖➖➖➖एक समय था जब मूंछों के बालों की सामाजिक हैसियत आज के डिजिटल
हस्ताक्षर जैसी हुआ...
5 घंटे पहले

वाह मित्र वाह क्या कविता है एक -2 पंक्तियाँ लाजवाब हैं, पढ़कर आनंद आ गया.
जवाब देंहटाएंलाजवाब | सत्यता को बयां करती बहुत ही उम्दा रचना | एक-एक पंक्ति में समाज की सच्छाई छुपी हुई है |
जवाब देंहटाएं"काव्य का संसार" में आपका हार्दिक स्वागत है | निरंतर इसी तरह सहयोग की आवश्यकता है | आभार |
जवाब देंहटाएंवाह आज के हालात का क्या मारमिक वर्णन है । सोने चांदी की दुकां पर रोटियां बिकने लगीं । हर एक शेर जबरदस्त ।
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