दुनियादारी
दोस्ती के नाम पर ,जाम पीनेवाले भी,
दोस्ती के दामन में ,दाग लगा देते है
धुवें से डरते है,लेकिन खुदगर्जी में,
खुद आगे रह कर के आग लगा देते है
रोज की बातें है ,जो अक्सर होती है
खुदगर्जी झगडे का ,बीज सदा बोती है
कभी कभी लेकिन कुछ ,एसा भी होता है,
दुश्मन तो साथ मगर ,दोस्त दगा देते है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
वसंत पंचमी
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वसंत पंचमी खिले कुसुम महकी अमराई मधु वासंती पवन बही है, ऋतुराजा का
स्वागत करने क़ुदरत सारी निखर रही है ! सरसों फूली खलिहानों में कण-कण जीवंत
हुआ भू का...
11 घंटे पहले
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