एक सन्देश-

यह ब्लॉग समर्पित है साहित्य की अनुपम विधा "पद्य" को |
पद्य रस की रचनाओ का इस ब्लॉग में स्वागत है | साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी |

सदस्यता को इच्छुक मित्र यहाँ संपर्क करें या फिर इस ब्लॉग में प्रकाशित करवाने हेतु मेल करें:-
kavyasansaar@gmail.com
pradip_kumar110@yahoo.com

इस ब्लॉग से जुड़े

सोमवार, 3 नवंबर 2025

लंबा जीवन 


लंबे से लंबा जीऊं मैं ,यह कोशिश है, बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दिया है


सुबह-सुबह उठ सैर और व्यायाम कर रहा 

खुद को प्राणायाम ध्यान से जोड़ लिया है 

खान-पान में प्रतिबंधों का ढेर लगा है, ना मीठा ना तली हुई कुछ चाट पकौड़ी


कई मधुर फल आम और अंगूर, शरीफा केला भी ना और मधुर लीची भी छोड़ी


 मेरी अति प्रिय गरम जलेबी और इमरती

अब तो रसगुल्ले खाने पर भी पाबंदी है


कभी-कभी एक छोटा पैग पिया करता  था

किंतु आजकल लागू पूर्ण नशाबंदी है


मेरी इसी लालसा ने लंबा जीने की,

मेरी जीवन की शैली को मोड़ दिया है 


लंबे से लंबा जीऊं मैं यह कोशिश है 

बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दिया है


 कई बार पर मन में द्वंद उठा करता है यह भी कोई जीवन है खाओ ना पियो


करो न कोई मस्ती पिकनिक मौज पार्टी, सिमटे चारदिवारी में बस जीवन जियो 


आठ वर्ष तक तड़प तड़प जीने के बदले

चार वर्ष तक मौज मस्ती का जीवन अच्छा 


इतने सुख के साधन हैं,उपभोग न करना

ना अपनी मर्जी का खाना पीना अच्छा


लंबे समय बुढ़ापे के दुख नहीं झेल कर,

मैंने मौज मस्ती से जीवन जोड़ लिया है


अब तो हंसी खुशी यह जीवन जीना है,

 बाकी सब ऊपर वाले पर छोड़ दिया है 


मदन मोहन बाहेती घोटू

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।

हलचल अन्य ब्लोगों से 1-