पते की बात
माँ की महत्ता
भीग कर बारिश में लौटा,एक दिन मै रात में
भाई बोला 'छाता क्यों ना ,ले गये साथ में '
बहन बोली'रूकती जब बरसात तुम आते तभी '
पिता बोले 'पड़ोगे बीमार ,सुधरोगे तभी '
तभी मेरे सर को पोंछा ,माँ ने लाकर तौलिया
गरम प्याला चाय का ,एक बना कर मुझको दिया
'बेटे ,कपडे बदल ले,सर्दी न लग जाए तुझे '
महत्ता माँ की समझ में,आ गयी उस दिन मुझे
घोटू
1520
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*परदेसी कान्हा**/ **शशि पाधा*
*कैसा उत्सव**, कैसी होली *
*कान्हा तो परदेस ग**ए *
*राधा से पूछें हमजोली*
*लौट आने को क्या कह ग**ए ?*
* भूलके सार...
3 घंटे पहले
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