माचिस की तिली
पेड़ की लकड़ी से बनती,कई माचिस की तिली ,
सर पे जब लगता है रोगन,मुंह में बसती आग है
जरा सा ही रगड़ने पर ,जलती है तिलमिला कर,
और कितने दरख्तों को ,पल में करती खाक है
घोटू
तुम्हारी ग़ज़ल
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दिनांक 14 फरवरी 2026, उदगार सभागार में प्रियंका तिवारी के ग़ज़ल संग्रह
तुम्हारी ग़ज़ल के लोकार्पण समारोह की कुछ तस्वीरें।
5 घंटे पहले
बहुत बहुत बधाई...
जवाब देंहटाएंअधिक संघर्ष से चन्दन भी जल जाता है |
जवाब देंहटाएंअवसर आने पर 'सुप्त ज्वालामुखी' भी उबल जाता है ||