पक्षपात
जब होता है समुद्र मंथन
तो दानव और देवता गण
करते है बराबर की मेहनत
पर जब निकलता है अमृत
तो विष्णु भगवान,मोहिनी रूप धर
सिर्फ देवताओं को अमृत बाँट कर
स्पष्ट ,करते पक्षपात है
बरसों से चली आ रही ये बात है
जो सत्ता में है,राज्य करते है
अपने अपनों का घर भरते है
अपनों को ही ठेका और प्रमोशन
टू जी ,या कोल ब्लोक का आबंटन
देकर परंपरा निभा रहे है
तो लोग क्यों हल्ला मचा रहे है ?
घोटू
अहंकार का भोजन दुख है
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अहंकार का भोजन दुख है माँ की कृपा से कटती माया राग-द्वेष के बंधन
काटे, ऊँची-नीची लहरों में भीसमता का इक कमल खिला दे !सत् चित् आनंद स्वरूप
है मानव ख़ुद का भ...
16 घंटे पहले
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