चुम्बक
तुझे देख पागल हो जाता
तेरी ओर खिंचा मै आता
तुझसे मिलता लपक लपक मै
तुझसे जाता चिपक चिपक मै
नहीं अगाथा मै तुमको तक
पर मै समझ न पाया अबतक
मै लोहा हूँ और तुम चुम्बक
या तुम लोहा और मै चुम्बक
घोटू
चिड़ पिड़ चूँ चूँ
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राजकीय पुस्तकालय, वाराणसी में वरिष्ठ साहित्यकारों के कर कमलों द्वारा बसंत
पंचमी के दिन हुआ पुस्तक 'चिड़-पिड़ चूँ-चूँ' का भव्य विमोचन।
हि...
4 घंटे पहले
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