पते की बात
मुश्किलें
जब भी हो मुश्किल में तुम या परेशां,अवसाद में
खड़े तुम हो जाओ जाकर आईने के सामने
आईने में आपको एक नज़र चेहरा आएगा
कैसे मुश्किल से निकलना ,आपको बतलायेगा
घोटू
जग इक अनुभव
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जग इक अनुभव उर की सरिता बहती जाये सागर से यह कहती जाये, तेरा-मेरा साथ
पुराना तुझसे हुई, तू ही बुलाये !आना सुख था, जाना भी है किया पसार, समेट रही
अब, जग इक ...
2 घंटे पहले
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