पते की बात
सब कुछ गुम हो गया
रात की नीरवता ,ट्रक और बसों की ,
चिन्धाड़ों में गुम हो गयी
दादी नानी की कहानियां,टी वी के,
सीरियलों में गुम हो गयी
बच्चों के चंचलता ,स्कूल के ,
होमवर्क के बोझ से गुम हो गयी
परिवार की हंसीखुशी ,बढती हुई ,
मंहगाई के बोझ से गुम हो गयी
आदमी की भावनाएं और प्यार ,
भौतिकता के भार तले गुम हो गया
घर के देशी खाने का स्वाद ,
पीज़ा और बर्गर के क्रेज़ में गुम हो गया
अब तो बस,मशीनवत ,जीवन सब जीते है
भरे हुए दिखते है ,अन्दर से रीते है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
815. रंग-बिरंगा (8 हाइकु)
-
रंग-बिरंगा
***
1.
अड़ा रहता
गुलमोहर-मन
हो कोई स्थिति।
2.
मन में उगा
गुलमोहर तरु
रंग-बिरंगा।
3.
अग्नि-से लाल
गुलमोहर फूल
बड़ा लुभाते।
4.
...
1 दिन पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।