माचिस की तिली
पेड़ की लकड़ी से बनती,कई माचिस की तिली ,
सर पे जब लगता है रोगन,मुंह में बसती आग है
जरा सा ही रगड़ने पर ,जलती है तिलमिला कर,
और कितने दरख्तों को ,पल में करती खाक है
घोटू
जीने की कला
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जीने की कला क्या मिला है? क्या नहींइसको न देखें क्या घटा है मन के भीतर
? क्या बने हैं, इसे परखें !धन मिला, पर बुझ गया मन यश मिला, पर ढल गया तन घर
बनाया ए...
1 दिन पहले
बहुत बहुत बधाई...
जवाब देंहटाएंअधिक संघर्ष से चन्दन भी जल जाता है |
जवाब देंहटाएंअवसर आने पर 'सुप्त ज्वालामुखी' भी उबल जाता है ||