माचिस की तिली
पेड़ की लकड़ी से बनती,कई माचिस की तिली ,
सर पे जब लगता है रोगन,मुंह में बसती आग है
जरा सा ही रगड़ने पर ,जलती है तिलमिला कर,
और कितने दरख्तों को ,पल में करती खाक है
घोटू
गलतियाँ ........
-
कुछ गलतियाँ गलती से हो जाती हैं कुछ नासमझी,नादानी से कुछ भावनाओं में
बहकर अनचाहा ही कुछ कहकर कुछ गलतियाँ छोड़ जाती हैं अपनी खरोंचों के निशान ऐसी
जगहों पर जि...
23 घंटे पहले
बहुत बहुत बधाई...
जवाब देंहटाएंअधिक संघर्ष से चन्दन भी जल जाता है |
जवाब देंहटाएंअवसर आने पर 'सुप्त ज्वालामुखी' भी उबल जाता है ||