मधुर मिलन की पहली रात
मेंहदी से तेरे हाथ रचे ,और प्यार रचा मेरे मन में
मुझको पागल सा कर डाला ,तेरी शर्मीली चितवन में
तेरे कंगन की खन खन सुन ,
है खनक उठी मेरी नस नस
तेरी मादक,मदभरी महक,
है खींच रही मुझको बरबस
नाज़ुक से हाथों को सहला ,
मन बहला नहीं,बदन दहला
हूँ विकल ,करू किस तरह पहल,
यह मिलन हमारा है पहला
मन हुआ ,बावला सा अधीर,है ऐसी अगन लगी तन में
मेंहदी से तेरे हाथ रचे, और प्यार रचा मेरे मन में
मन का मयूर है नाच रहा,
हो कर दीवाना मस्ती में
तुमने निहाल कर दिया मुझे,
बस कर इस दिल की बस्ती में
चन्दा सा मुखड़ा दिखला दो,
क्यों ढका हुआ घूंघट पट से
मतवाली ,रूप माधुरी का,
रसपान करूं ,अमृत घट से
सब लाज,शर्म को छोड़ छाड़ ,आओ बंध जाये बंधन में
मेंहदी से तेरे हाथ रचे ,और प्यार रचा मेरे मन में
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सदस्यता के नाम पर बार वकील को प्रेक्टिस से नहीं रोक सकती-तेलंगाना हाईकोर्ट
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तेलंगाना हाईकोर्ट (Telangana High Court) के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, बार
एसोसिएशन की सदस्यता पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि कोई वकील किसी बार
एसोसिएशन...
1 दिन पहले
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