पते की बात
जेब
है अजब ये जिंदगानी ,जब थे हम पैदा हुए ,
पहले ,पहनी ,लंगोटी,उसमे न कोई जेब था
जिंदगी भर जेब भरने की कवायद में लगे,
मरे तो ओढा कफ़न, उसमे न कोई जेब था
घोटू
चिड़ पिड़ चूँ चूँ
-
राजकीय पुस्तकालय, वाराणसी में वरिष्ठ साहित्यकारों के कर कमलों द्वारा बसंत
पंचमी के दिन हुआ पुस्तक 'चिड़-पिड़ चूँ-चूँ' का भव्य विमोचन।
हि...
4 घंटे पहले
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