ये मन बृन्दावन हो जाता
तेरी गंगा, मेरी यमुना ,
मिल जाते,संगम हो जाता
तन का ,मन का ,जनम जनम का,
प्यार भरा बंधन हो जाता
जगमग दीप प्यार के जलते ,
ज्योतिर्मय जीवन हो जाता
रिमझिम रिमझिम प्यार बरसता ,
हर मौसन सावन हो जाता
प्यार नीर में घिस घिस ये तन,
महक भरा चन्दन हो जाता
इतने पुष्प प्यार के खिलते ,
जग नंदनकानन हो जाता
श्वास श्वास के मधुर स्वरों से,
बंसी का वादन हो जाता
रचता रास ,कालिंदी तीरे ,
ये मन वृन्दावन हो जाता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
815. रंग-बिरंगा (8 हाइकु)
-
रंग-बिरंगा
***
1.
अड़ा रहता
गुलमोहर-मन
हो कोई स्थिति।
2.
मन में उगा
गुलमोहर तरु
रंग-बिरंगा।
3.
अग्नि-से लाल
गुलमोहर फूल
बड़ा लुभाते।
4.
...
1 दिन पहले
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