ये प्यारा इन्कार तुम्हारा
पहले तो ये सजना धजना ,
मुझे लुभाना और रिझाना
बाँहों में लूं ,छोडो छोडो ,
कह कर मुझसे लिपटे जाना
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा ,
रूठ रूठ कर के मन जाना
वो प्यारी सी मान मनोवल ,
आकर पास ,छिटक फिर जाना
इन्ही अदाओं का जादू तो,
मन की तड़फ ,आग भड़काता
अगर ना नुकर तुम ना करती ,
कैसे मज़ा प्यार का आता
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
गलतियाँ ........
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कुछ गलतियाँ गलती से हो जाती हैं कुछ नासमझी,नादानी से कुछ भावनाओं में
बहकर अनचाहा ही कुछ कहकर कुछ गलतियाँ छोड़ जाती हैं अपनी खरोंचों के निशान ऐसी
जगहों पर जि...
23 घंटे पहले
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