ये प्यारा इन्कार तुम्हारा
पहले तो ये सजना धजना ,
मुझे लुभाना और रिझाना
बाँहों में लूं ,छोडो छोडो ,
कह कर मुझसे लिपटे जाना
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा ,
रूठ रूठ कर के मन जाना
वो प्यारी सी मान मनोवल ,
आकर पास ,छिटक फिर जाना
इन्ही अदाओं का जादू तो,
मन की तड़फ ,आग भड़काता
अगर ना नुकर तुम ना करती ,
कैसे मज़ा प्यार का आता
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
निजता
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निजता किसी को, कुछ और नहीं होना है जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना
है गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा कमल जल में ही चहकेगा निजता को पहचान, उस पर
महल बनाना...
15 घंटे पहले
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