कुछ तो ख्याल किया होता
जिनने जीवन भर प्यार किया ,
उन्हें कुछ तो प्यार दिया होता
मेरा ना मेरी बुजुर्गियत ,
का कुछ तो ख्याल किया होता
छोटे थे थाम मेरी उंगली ,
तुम पग पग चलना सीखे थे,
मै डगमग डगमग गिरता था,
तब मुझको थाम लिया होता
जब तुम पर मुश्किल आई तो ,
मैंने आगे बढ़ ,मदद करी,
जब मुझ पर मुश्किल आई तो,
मेरा भी साथ दिया होता
मैंने तुमसे कुछ ना माँगा ,
ना मांगू ,ये ही कोशिश है,
अहसानों के बदले मुझ पर,
कुछ तो अहसान किया होता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
लैंगिक भेदभाव और मातृत्व
-
- प्रेम प्रकाश
भारत में मां को त्याग, समर्पण और अनंत जिम्मेदारियों के प्रतीक के रूप में
महिमामंडित किया जाता है, लेकिन इस छवि के पीछे एक असहज सच छिपा है...
1 दिन पहले
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