सम्बन्ध
हमारे संबंध क्या हैं ?पारदर्शी कांच है
खरोंचे उस पार की भी,नज़र आती साफ़ है
जरा सा झटका लगे तो,टूट कर जाते बिखर ,
सावधानी से बरतना ,ही अकल की बात है
घोटू
जग इक अनुभव
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जग इक अनुभव उर की सरिता बहती जाये सागर से यह कहती जाये, तेरा-मेरा साथ
पुराना तुझसे हुई, तू ही बुलाये !आना सुख था, जाना भी है किया पसार, समेट रही
अब, जग इक ...
2 घंटे पहले
भावो का सुन्दर समायोजन......
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