पते की बात
डस्ट बिन
नोट दस रूपये का मुझको ,मिला,मैंने ये कहा ,
इस तरह इतराओ मत ,कागज़ का एक टुकड़ा हो तुम
मुस्कराया नोट बोला ,दोस्त सच कहते हो तुम ,
मगर अब तक नहीं देखी ,मैंने कोई 'डस्ट बिन '
घोटू
1505
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*लेखक का पाठक होना ही सृजन की दृष्टि है - ऋता शेखर ‘मधु’*
*सृजन- दृष्टि (समीक्षा- संग्रह): डॉ. शिवजी श्रीवास्तव**, **पृष्ठ - **192, **मूल्य
- **550...
1 दिन पहले
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