पते की बात
माँ का त्याग
घर में पांच लोग होते थे,,
पर जब चार सेव आते
तब माँ ही होती जो कहती ,
मुझे सेव फल ना भाते
घोटू
वही वही
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आकाश एक वही अनंत आकाश झरता है जिसमें से परम प्रकाश वही आश्रय है हमारा उपजे
उसी से उसी में समा जाएँगे कुछ पल डोलेंगे यहाँ इंद्रधनुष की तरह देखते-देखते
विली...
1 दिन पहले
माँ तो ऐसी ही होती हैं ,दिल छू लेने वाली रचना
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