पते की बात
माँ का त्याग
घर में पांच लोग होते थे,,
पर जब चार सेव आते
तब माँ ही होती जो कहती ,
मुझे सेव फल ना भाते
घोटू
जीने की कला
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जीने की कला क्या मिला है? क्या नहींइसको न देखें क्या घटा है मन के भीतर
? क्या बने हैं, इसे परखें !धन मिला, पर बुझ गया मन यश मिला, पर ढल गया तन घर
बनाया ए...
1 दिन पहले
माँ तो ऐसी ही होती हैं ,दिल छू लेने वाली रचना
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