आप आये
सर्द मौसम,आप आये
अकेलापन ,आप आये
दुखी था बमन,आप आये
बड़ी तडफन ,आप आये
खिल उठा मन,आप आये
हुई सिहरन,आप आये
मिट गया तम,आप आये
रौशनी बन ,आप आये
खनका आँगन,आप आये
बंधे बंधन,आप आये
बहका ये तन,आप आये
महका जीवन आप आये
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
निजता
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निजता किसी को, कुछ और नहीं होना है जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना
है गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा कमल जल में ही चहकेगा निजता को पहचान, उस पर
महल बनाना...
15 घंटे पहले
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