सम्बन्ध
हमारे संबंध क्या हैं ?पारदर्शी कांच है
खरोंचे उस पार की भी,नज़र आती साफ़ है
जरा सा झटका लगे तो,टूट कर जाते बिखर ,
सावधानी से बरतना ,ही अकल की बात है
घोटू
अहंकार का भोजन दुख है
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अहंकार का भोजन दुख है माँ की कृपा से कटती माया राग-द्वेष के बंधन
काटे, ऊँची-नीची लहरों में भीसमता का इक कमल खिला दे !सत् चित् आनंद स्वरूप
है मानव ख़ुद का भ...
17 घंटे पहले
भावो का सुन्दर समायोजन......
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