सपने सभी सच हो गए
१
नज़र तिरछी डाल अपने हुस्न से जादू किया,
तीर इतने मारे उनके खाली तरकश हो गए
जाल उनने बिछाया,हमको फंसाने के लिए,
मगर कुछ एसा हुआ की जाल में खुद फंस गए
बस हमारी दोस्ती की दास्ताँ इतनी सी है,
उनने देखा,हमने देखा,दिल में कुछ कुछ सा हुआ,
उनने दिल में झाँकने की सिर्फ दी थी इजाजत,
हमने गरदन और फिर धड,डाला,दिल में बस गए
२
आग उल्फत की जो भड़की,बुझाये ना बुझ सकी,
वो भी बेबस हो गए और हम भी बेबस हो गए
लाख कोशिश की निकलने की निकल पाए नहीं,
दिल की सकरी गली में यूं टेढ़े होकर फंस गए
सोचते है बिना उनके जिंदगी का ये सफ़र,
कैसे कटता,हमसफ़र बन,अगर वो मिलते नहीं,
शुक्रिया उनका करूं या शुक्र है अल्लाह का,
वो मिले,संग संग चले,सपने सभी सच हो गए
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
नाम...
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तुम्हारा नाम याद करने की कोशिश कर रही हूँ
जाने किस नाम से पुकारती थी तुम्हें उन दिनों…
चेहरा एकदम साफ़ उतर आता है आँखों के आगे
जैसे सामने देख रही हूँ कोई ...
10 घंटे पहले
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