आज फिर मौसम सुहाना हो गया है
शुरू तेरा मुस्कराना हो गया है
आज फिर मौसम सुहाना हो गया है
जिंदगी बदली है जब से इस गली में,
शुरू तेरा आना जाना हो गया है
तरसती आँखें तेरे दीदार को,
आरजू बस तुझको पाना हो गया है
दिखा कर हुस्नो अदाये, नाज़ से,
काम बस हमको सताना हो गया है
अब भी आतिश है हमारे जिगर में,
जिस्म का चूल्हा पुराना हो गया है
बारिशों में भीगता देखा तुम्हे,
बेसबर ये दिल दीवाना हो गया है
ऐसी तडफन बस गयी दिल में मेरे,
हँसे खुलके,एक ज़माना हो गया है
क्या बतायें,आजकल अपना मिजाज़,
कुछ अधिक ही आशिकाना हो गया है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
वकील के लिए मुवक्किल की स्पष्ट लिखित अनुमति आवश्यक-सुप्रीम कोर्ट
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यह महत्वपूर्ण फैसला '*कृष्णा कुमार ओझा और अन्य बनाम जितेंद्र चौधरी और अन्य'
मामले* में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है।
इस मामले से जुड़ी मुख्य जानकारि...
6 घंटे पहले
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