इतना ही काफी है
बच्चे ,अब बढे हो गये है
अपने पैरों पर खड़े हो गये है
ख़ुशी है ,कुछ बन गये है
गर्व से पर तन गये है
कभी कभी जब मिलते
लोकलाज या दिल से
चरण छुवा करते है
कमर झुका लेते है
ये भी क्या कुछ कम है
खुश हो जाते हम है
नम्रता कुछ बाकी है
इतना ही काफी है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
हल्का होकर उड़े गगन में
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हल्का होकर उड़े गगन में ख़ुदबुद करती रही चेतना धक-धक करता रहा हृदय
यह,उठतीं-गिरती रहतीं लहरें लिप्सा कभी, कभी छाया भय !कितनी चट्टानें थीं
भारी रस्तों में प...
7 घंटे पहले
सटीक पंक्तियाँ - इतना ही काफी है समझाने को, मन को.
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