शिकायत
बड़ी बड़ी दावतों में जाना
और जम कर पीना,खाना
तरह तरह के पकवानों का,
लेते लेते स्वाद
आदमी इतना डट कर खा लेता है,
कि खाने पीने के बाद
डकारें लेता है,पेट सहलाता है
घर आते ही बिस्तर पर,
गिरता ,सो जाता है
ये सच है,दावत खाने के बाद,
आदमी किसी भी काम का नहीं रह जाता है
मदन मोहन बहेती'घोटू'
1520
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*परदेसी कान्हा**/ **शशि पाधा*
*कैसा उत्सव**, कैसी होली *
*कान्हा तो परदेस ग**ए *
*राधा से पूछें हमजोली*
*लौट आने को क्या कह ग**ए ?*
* भूलके सार...
2 घंटे पहले
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