आम -आदमी
बचपन हो या जवानी,
कच्चे आम की तरह होती है,
चटपटी,खट्टी मीठी,
चटकारे ले ले कर खालो
चटनी,अचार,मुरब्बा या पना,
जो चाहो,बना लो
पर जब अनुभवों की ऊष्मा से,
उनमे पकाव आता है
तो निराली सी स्वर्णिम आभा से,
उनका रूप महक जाता है
और वो बन जाते है आम,
स्वादिष्ट, सुगन्धित,रस भरे,
जिनकी हर घूँट में मिठास होता है
खाओ या चूंसो,
संतुष्टि का आभास होता है
जीवन के इस अंतिम चरण में भी,
गजब का स्वाद होता है
रस तो रस,गुठलियों का भी दाम होता है
हर आम आदमी का जीवन,
आम होता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएँ
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माँ शारदे तू ही तो है पहली शिक्षक भाषाविद् व ज्ञान प्रदायिनी, मौन सृष्टि
में गूँज उठी थी स्वर-अक्षर भर तेरी वाणी !गायन-वादन का दिया ज्ञान मनुज का
किया दूर ...
19 घंटे पहले
वाह ..क्या उदाहरण देकर जीवन का सार समझाया हैं आपने ....आभार
जवाब देंहटाएंजीवन को नए नजरिये से देखने का अंदाज प्यारा है ,बधाई.
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