भावनाए मेरी भी समझा करो तुम
मै समझता हूँ तुम्हारी भावनाएं,
भावनाएं मेरी भी समझा करो तुम
चाहती हो तुम कि मै तुमको सराहूं
तुम्हारे सौन्दर्य में, मै डूब जाऊं
तुम्हारी तारीफ़ हरदम रहूँ करता,
प्रेम में रत,मै तुम्हारे गीत गाऊँ
मै समझता हूँ तुम्हारी कामनाएं,
कामनाएं मेरी भी समझ करो तुम
कर दिया है,जब सभी कुछ तुम्हे अर्पण
प्यार क्यों प्रतिकार में मांगे समर्पण
एक दूजे के बने हम परिपूरक,
एक दूजे कि प्रतिच्छवी ,बने दर्पण
मै महकता हूँ तुम्हारी सुगंधी से,
गंध से मेरी कभी महका करो तुम
मै उमड़ता भाव हूँ,तुम हो कविता
और शीतल चन्द्रमा तुम,मै सविता
कलकलाती बह रही ,आतुर मिलन को,
प्यार का मै हूँ समंदर,तुम सरिता
जिस तरह मै चहकता हूँ तुम्हे लख कर,
देख मुझको भी कभी चहका करो तुम
मै समझता हूँ तुम्हारी भावनाए,
भावनाएं मेरी भी समझा करो तुम
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
आपसी सहमति से तलाक मे वापसी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
-
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि
*भले ही आपसी सहमति से तलाक के मामलों में कोई भी पक्ष अंतिम डिक्री से पहले
अपनी सहमति वापस ले सकता ...
20 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।