बाल रंग कर के बूढा आया है
देखो कैसा जूनून छाया है
बाल रंग कर के बूढा आया है
पहन ली जींस,बड़ी टाईट है
और टी शर्ट भी बड़ी फिट है
खूब परफ्यूम तन पे है छिड़का
बड़ा रंगीन है मिजाज़ इसका
गोल्ड का फेशियल कराया है
देखो कैसा जूनून छाया है
बहुत गुल खिलाये जवानी में
लगाई आग ठन्डे पानी में
आजकल बहुत कसमसाता है
स्वर्ण की भस्म रोज़ खाता है
देख कर हुस्न छटपटाया है
देखो कैसा जूनून छाया है
भले ही बूढा हो गया बन्दर
जोश अब भी है जिस्म के अन्दर
हरकतें मनचलों सी करता है
गुलाटी के लिए मचलता है
बासी कढ़ी में उबाल आया है
देखो कैसा जूनून छाया है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौबीस (24)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौबीस (24)भाग 24 अंशुमन अगर आपको यह कहानी पसंद
आ रही हो तो प्लीज ऐमज़ान पर जाकर इसका रिव्यू लिख आइए। इससे मेरी किताबों को
आमजन ...
12 घंटे पहले
:)
जवाब देंहटाएंकलमदान
अच्छा व्यंग्य है।
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