गुस्सा या शृंगार
(घोटू के छक्के )
पत्नी अपनी थी तनी,उसे मनाने यार
हमने उनसे कह दिया,गलती से एक बार
गलती से एक बार,लगे है हमको प्यारा
गुस्से में दूना निखरे है रूप तुम्हारा
कह तो दिया,मगर अब घोटू कवी रोवे है
बात बात पर वो जालिम गुस्सा होवे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
भारत वंदना
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माटी के कण-कण में देखो, हुआ सुवासित चंदन।
गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, सुंदर सभी दिशाएँ।
अरुणोदय या हो अस्ताचल...
1 दिन पहले
शानदार तरीका है मनाने का | बधाई स्वीकारें |
जवाब देंहटाएंगुस्सा क्यूँ दिलाया ...
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया नोक-झोंक ....