एक सन्देश-

यह ब्लॉग समर्पित है साहित्य की अनुपम विधा "पद्य" को |
पद्य रस की रचनाओ का इस ब्लॉग में स्वागत है | साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी |

सदस्यता को इच्छुक मित्र यहाँ संपर्क करें या फिर इस ब्लॉग में प्रकाशित करवाने हेतु मेल करें:-
kavyasansaar@gmail.com
pradip_kumar110@yahoo.com

इस ब्लॉग से जुड़े

मंगलवार, 19 मई 2020

कोरोना से गुहार -अलग अलग लोगों द्वारा

पुरुष द्वारा
-----------------

ओ कोरोना सर जी
दिन चल रहे तुम्हारे ,सतालो ,हो जितनी भी मरजी
पूरी तुमको ,टक्कर देंगें ,हम साहस से  भर जी
देंगे भगा ,उखाड़ तुम्हारा ,बोरिया और बिस्तर जी
वेक्सीन आ प्राण तुम्हारा ,झट से लेगा हर जी
फिर से रौनक आ जायेगी,हर घर ,गांव ,शहर जी
करते है नेतृत्व हमारा ,मोदी से लीडर जी
 ओ कोरोना सर जी

महिला द्वारा
--------------
सुनो तुम ओ कोरोना भैया
नचा रहे सारी दुनिया को ,करवा था था थैया
अच्छे अतिथि ,तीन चार दिन ,फिर लगते है आफत
तुम दो महीने से बैठे हो ,तुम में नहीं शराफत  
बंद पड़े बाज़ार ,नहीं की ,इतने दिन से शॉपिंग
ब्यूटी के सेलून बंद ना हेयर सेटिंग कलरिंग
पति बैठ घर ,करे ऑर्डर ,ये लाओ वो लाओ
परेशान कर डाला मुझको ,बंद बंद करवाओ
फिर से चलने लगे ढंग से ,हमरी जीवन नैया
सुनो तुम ओ कोरोना भैया

बच्चे द्वारा
-----------

अजब हो तुम कोरोना अंकल
कितने दिन से कैद कर रखा ,हमको घर के अंदर
ना क्रिकेट ,फ़ुटबाल गेम कुछ खेल सकें घर बाहर
गर्मी की छुट्टी है लेकिन ,जा न पाए नानी घर
बहुत हुआ मेरी नगरी  से ,निकल जाओ अब कल
वरना  पत्थर मार मार कर, कर दूंगा मैं  घायल
बच्चों का भी ख्याल न रखते ,तुम हो दुष्ट भयंकर
अजब हो तुम कोरोना अंकल

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।

हलचल अन्य ब्लोगों से 1-