जहाँ खुला आकाश मात्र था
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जहाँ खुला आकाश मात्र था भ्रम के कितने सर्प पल रहे मानव को ख़ुद ही डसते
हैं, लगती होड़ सुपर होने की अहंकारी मुल्क भिड़ते हैं !जहाँ खुला आकाश मात्र
था मानव ...
11 घंटे पहले
bahut badhiya rachna..
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