चाहत
तुम्हें लौकी पसंद है तो पकाओ और खाओ तुम
मैं हूं पकवान का प्रेमी, मुझे हलवा खिलाओ तुम
पसंद हर एक इंसान की, होती अपनी-अपनी है,
पसंद तुम मेरे दिल की हो बस इतना जान जाओ तुम
2
तुम्हारी आंख में बसता,भले ही काला काजल मै
भरा हूं भावनाओं से,बड़ा गहरा हूं बादल मैं
ये चाहत है मैं जब बरसूं,तेरा अंगना हो तू भीजे
रहे तू सामने हरदम , निहारूं तुझको पल-पल मै
3
कसम तुमको मेरे दिल की ,कभी भी दूर मत होना
जमाना लाख रोके पर ,कभी मजबूर मत होना
भले ही हुस्न बरपा है, खुदा ने अपने हाथों में,
चांदनी चार दिन की है ,कभी मगरूर मत होना
4
तुम्हारा चांद सा चेहरा ,वो जब मेरे करीबआया
उठी लहरें समंदर में,जलजला एक अजीब आया
हमारा मिलना आपस में,खुदा ने ही लिखा होगा,
जो इतनी पास दोनों को हमारा यह नसीब लाया
मदन मोहन बाहेती घोटू
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