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गुरुवार, 24 सितंबर 2020


\मुझको लल्लू बना दिया

मेरी खिदमत  कर बीबी ने ,है मुझे निठल्लू बना दिया
 यूं तो मैं अच्छा ख़ासा हूँ पर मुझको लल्लू बना दिया

अहसासे बुढ़ापा दिला दिला ,वो मेरी सेवा करती है
तुम ये न करो ,तुम वो न करो ,प्रतिबंध लगा कर रखती है
मैं ऊंचा बोलूं तो कहती ,ब्लड का प्रेशर बढ़ जाएगा
कहती मीठा ,मत खाओ तुम  ,शुगर लेवल चढ़ जाएगा  
वह रखती मुझे संभाले ज्यों ,साड़ी का पल्लू बना दिया
यूं तो मैं अच्छा खासा हूँ ,पर मुझको लल्लू बना दिया  

करने ना देती काम कोई ,है  मुझ पर कितने रिस्ट्रिक्शन  
हलकी सी  खांसी आजाये  ,चालू हो जाता मेडिकेशन  
ये सारा नाटक ,इस कारण ,वो मुझको लम्बा टिका सके
व्रत करवा चौथ ,सुहागन बन ,वो जब तक जिये ,मना सके
लेकिन मुझको ,आरामतलब बनवा के मोटल्लू बना दिया
यूं तो मैं अच्छा खासा हूँ  ,पर मुझको लल्लू बना दिया

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

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