मगर माँ बस एक है
कई तारे टिमटिमाते,आसमां में रात भर,
मगर सूरज एक है और चंद्रमां बस एक है
कहने को तो दुनिया में कितने करोड़ों देवता,
मगर जो दुनिया चलाता,वो खुदा बस एक है
कई टुकड़ों में गयी बंट,देश कितने बन गए,
ये धरा पर एक ही है,आसमां भी एक है
कई रिश्ते है जहाँ में,भाभियाँ है चाचियाँ,
बहने है,भाई कई है ,मगर माँ बस एक है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सरस्वती -वन्दना
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* डॉ.सुरंगमा यादव*
*प**द्मासना वीणापाणि, ज्ञान गरिमादायिनी*
*श्वेतवसना*
*, शुभ्रवर्णा, हस्त पुस्तकधारिणी है प्रणत मन तव चरण में ,तुम कृपा...
11 घंटे पहले
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