चार दिन की जिंदगी
जन्म ले रोते हैं पहले,बाद में मुस्काते हैं,
और फिर किलकारियों से,हम लुटाते प्यार हैं
फिर पढाई,लिखाई और खेलना मस्ती भरा,
ये किशोरावस्था भी,होती गज़ब की यार है
प्यार,जलवा,नाज़,अदाएं,मौज,मस्ती रात दिन,
ये जवानी,चार दिन का ,मद भरा त्योंहार है
और फिर लाचार करता है बुढ़ापा सभी को,
कुछ नहीं उपचार इसका,जिंदगी दिन चार है
मदन मोहन बहेती'घोटू'
उत्तर प्रदेश सरकार तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई
कोर्ट
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*इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 3 महीने
के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है।*
*इलाहाबाद हा...
9 घंटे पहले
चार लाइन में चार दिन की जिंदगी का वर्णन अच्छा लगा :'मेरी नई रचना "स्मृति के पन्नों से " पर नजर डालें ,अपनी राय दें.
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