जीवन तो है चाट चटपटी
जीवन तो है तला पकोड़ा ,मस्त चटपटा ,गरम गरम ,
कोई चेप चेप चटनी से,इसके मज़े उठाता है
है परहेज किसी को मिर्ची से या तली वस्तुओं से ,
'क्लोस्ट्राल 'नहीं बढ़ जाए ,खाने में घबराता है
आलू की टिक्की सा यौवन,गरम गरम ,सौंधी खुशबू,
जैसे लगता चाट चटपटी,मुंह में आता है पानी
कोई 'टोन्सिल 'से डरता है तो कोई 'इन्फेक्शन 'से,
मन ललचाता फिर भी खाने में करता आना कानी
एक गोलगप्पे से जैसा ,जब हो खाली ये जीवन,
इसमें भरो चटपटा पानी ,मुंह में रख्खो ,खा जाओ
तीन समोसे के कोनो में ,तीन लोक दर्शन कर लो ,
जी भर इनका मज़ा उठाओ, निज मन को मत तरसाओ
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
1521-शिक्षक- दिवस की पीड़ा
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*डॉ.** पूनम चौधरी*
*पूरे साल तौली जाती है उसकी निष्ठा**,*
*परखी जाती है उसकी ईमानदारी**,*
*हर रोज़ नई कसौटी पर*
*कसी जाती है उसकी नीयत।*
*फिर पाँच...
2 दिन पहले
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