अबकी होली ऐसे खेलो
घर के बुजुर्ग भी इन्सां है
उनके भी मन में अरमां है
एकाकीपन उन्हें खटकता है
मुश्किल से वक़्त गुजरता है
तुम जान तभी ये पाओगे
जब तुम बूढ़े हो जाओगे
वे जीवनदाता तुम्हारे
तुम लगते हो जिनको प्यारे
ये बात बहुत चुभती मन को
कर रहे उपेक्षित तुम उनको
वे यह अहसान चाहते है
थोडा सा ध्यान चाहते है
मेरा तुमसे ये कहना है
वे बड़े दुखी है,तनहा है
उनका मन जरा टटोलो तुम
दो शब्द प्यार के बोलो तुम
मुट्ठी भर प्यार उन्हें दे दो
सुख का संसार उन्हें दे दो
अबकी होली में ले गुलाल
उनका मुंह रंग दो,लाल लाल
पग छुवो,करो प्रणाम उन्हें
दे दो थोडा सन्मान उन्हें
उनके झुर्राये से मुख पर
उमड़ेंगे ,खुशियों के बादल
आँखों से बह कर प्रेमनीर
कर देगा तुमको भी अधीर
बस इतना सा कर देने पर
जायेंगे वो खुशियों से भर
वो दिल से तुम्हे दुआ देंगे
और आशिषे बरसा देंगे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मौसम का उल्लास समेटे
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मौसम का उल्लास समेटे घन घन घन घन मेघ गरजते टिप टिप टिप टिप झरतीं
बूँदें,पारिजात, कंचन, कनेर मिल भीग रहे सरसाएं झूमें !गगन सलेटी, पवन नशीली
भीगी गलियाँ, सड़...
19 घंटे पहले
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