घोटू के पद
महिला दिवस पर विशेष
बिन घूँघरू ,नारी नाची रे
घरवाले सब नाच नचायें,फिरती भागी भागी रे
रही रात भर ,नींद उचटती ,सो ना पायी जागी रे
ससुर साहब ,खर्राटे भरते,सास रात भर खांसी रे
सुबह हुई ,जुट गयी काम में ,ले ना पायी उबासी रे
चूल्हा चौका,झाड़ू पोंछा,बन गयी घर की दासी रे
शाम पड़े तक ,पस्त होगई ,मुख पर छाई उदासी रे
सोते ही बस ,आँख लग गयी,पिया मिलन की प्यासी रे
'घोटू'कठिन,नारी का जीवन ,खेल नहीं ना हांसी रे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मौसम का उल्लास समेटे
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मौसम का उल्लास समेटे घन घन घन घन मेघ गरजते टिप टिप टिप टिप झरतीं
बूँदें,पारिजात, कंचन, कनेर मिल भीग रहे सरसाएं झूमें !गगन सलेटी, पवन नशीली
भीगी गलियाँ, सड़...
19 घंटे पहले
बढिया
जवाब देंहटाएंजब ऐतना ही दुखता है तो इ सब खुदेइ काहे नहीं करते.....
जवाब देंहटाएंएक मेनका उतारी वो भी उसकी चाची रे.....
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