मज़ा होली का
सुघड पड़ोसन ,कितनी सुन्दर ,आती जाती,मुस्काती है
भले तुम्हारे ,मन को भाती ,पर भाभीजी ,कहलाती है
लेकिन जब होली आती है ,मिट जाता ,मन का मलाल है
उनके कोमल से गालों पर ,जब हम मल सकते गुलाल है
एक साल में,एक बार ही ,मिट सकती ,मन की भड़ास है
होली का यह पर्व इसलिये ,मन को भाता ,बड़ा ख़ास है
घोटू
मृत्यु के उस अंधकार से
-
मृत्यु के उस अंधकार से जो सृष्टि की मूल प्रकृति हैं तीनों गुणों को करें
सक्रिय, घोर विनाश की महारात्रि भीषण, उग्र ज्यों अंतिम प्रलय !काल नहीं ठहरता
उनमें म...
23 घंटे पहले
प्रदीप जी - कृपया बैकग्राउंड बदल लें , या फिर टेक्स्ट बॉक्सेस को "opaque" कर लें । पढना बहुत मुश्किल होता हैं ।
जवाब देंहटाएं