कोई डॉक्टर बताये - मुझे क्या हुआ है?
घनीभूत कुछ तरल ,नासिका छिद्रों में है जमा हुआ
हुआ मार्ग अवरुद्ध ,श्वास का गमन,आगम थमा हुआ
कंठ मार्ग भी वाधित है ,कुछ भी गटको तो करे पीर
शिथिल हुआ तन,आलस छाया ,है परेशान ,ये मन अधीर
जलन चक्षुओं में होती है,मस्तक थोडा भारी है
उष्मित है तन,सुनो चिकित्सक,मुझको कौन बिमारी है
है उपचार कौनसा इस ,व्याधि का मुझको बतलाओ
शीध्र स्वस्थ हो जाऊं मै भेषज कुछ ऐसी दिलवाओ
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
1521-शिक्षक- दिवस की पीड़ा
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*डॉ.** पूनम चौधरी*
*पूरे साल तौली जाती है उसकी निष्ठा**,*
*परखी जाती है उसकी ईमानदारी**,*
*हर रोज़ नई कसौटी पर*
*कसी जाती है उसकी नीयत।*
*फिर पाँच...
2 दिन पहले
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