घोटू के पद
मन,तू ,क्यों कूतर सा भागे
मन तू,क्यों कूतर सा भागे
मै तेरे पीछे दौडत हूँ,और तू आगे आगे
भोर भये तू शोर मचावत ,घर की देहरी लांघे
तेरी डोर ,हाथ मेरे पर, सधे नहीं तू साधे
इत उत सूँघत ,पीर निवारे,इधर उधर भटकाके
रहत सदा चोकन्ना पर तू,रखे मोहे उलझाके
'घोटू'स्वामिभक्त कहाये,निस दिन नाच नचाके
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1477-नया साल
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*नया साल/ डॉ.सुरंगमा यादव*
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*2-साल पुराना चला गया /डॉ. कनक लता*
*कुछ खट्टे**, कुछ मीठे, कुछ कड़वे लम्हों को सँजोया गया*
*कभी ख़ुशनुमा हुई ज़ि...
1 दिन पहले
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