सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मौसम का उल्लास समेटे
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मौसम का उल्लास समेटे घन घन घन घन मेघ गरजते टिप टिप टिप टिप झरतीं
बूँदें,पारिजात, कंचन, कनेर मिल भीग रहे सरसाएं झूमें !गगन सलेटी, पवन नशीली
भीगी गलियाँ, सड़...
19 घंटे पहले
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