सर ऊपर उठाना है
अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ कर ,अपना सर ऊपर उठाना है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
मृत्यु के उस अंधकार से
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मृत्यु के उस अंधकार से जो सृष्टि की मूल प्रकृति हैं तीनों गुणों को करें
सक्रिय, घोर विनाश की महारात्रि भीषण, उग्र ज्यों अंतिम प्रलय !काल नहीं ठहरता
उनमें म...
23 घंटे पहले
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