तिलहन,दलहन और दुल्हन
लोग क्लोरोस्ट्राल से घबराते है
इसलिए तेल कम खाते है
फिर भी तेल के दाम बढे जाते है
उपज कम है,इसलिए ,मंहगी है तिलहन भी
सब तरफ दाल में काला ही काला है
मंहगाई ने सबका दम ही निकाला है
दाल बिना रोटी का सूखा निवाला है
कम होती है पैदा,मंहगी है, दलहन भी
नारी तो है देवी,नारी है मातायें
लेकिन नारी को ही,अब बेटी ना भाये
नहीं रुकी कन्या के भ्रूण की हत्याएं
हो जाएगी दुर्लभ,तब मिलना दुल्हन भी
मदन मोहन बहेती'घोटू'
तेरा-मेरा भेद हुआ कब
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तेरा-मेरा भेद हुआ कब तू सिंधु, मैं बूँद हूँ तेरी तू सूरज मैं किरण
सुनहरी, तू संपूर्ण समष्टि, मैं व्यष्टि तू बोध विशुद्ध हूँ मैं दृष्टि ! तू
व्यापक, मैं तेर...
23 घंटे पहले
सार्थक सन्देश का प्रवाह है आज की पोस्ट आभार|
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