अपना अपना नजरिया
एक बच्चा कर में जा रहा था
एक बच्चा साईकिल चला रहा था
साईकिल वाले बच्चे ने सोचा,
देखो इसका कितना मज़ा है
कितना सजा धजा है
न धूल है,न गर्मी का डर है
नहीं मारने पड़ते पैडल है
क्या आराम से जी रहा है
कार वाले लड़के ने सोचा,
मै कार के अन्दर हूँ बंद
मगर इस पर नहीं कोई प्रतिबन्ध
जिधर चाहता है ,उधर जाता है
अपने रास्ते खुद बनाता है
कितने मज़े से जी रहा है
दोनों की भावनायें जान,
ऊपरवाला मुस्कराता है
कोई भी अपने हाल से संतुष्ट नहीं है,
दूसरों की थाली में,
ज्यादा ही घी नज़र आता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
प्रेम रहेगा कैसे मन में
-
प्रेम रहेगा कैसे मन मेंजब ना कोई घर में रहता तब चुपके से कान्हा आता, नवनीत
चुरा मटका तोड़े गोपी का हर दुख मिट जाता !द्वार खुला ही छोड़ गई थी निशदिन
उसकी र...
5 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।