एक सन्देश-

यह ब्लॉग समर्पित है साहित्य की अनुपम विधा "पद्य" को |
पद्य रस की रचनाओ का इस ब्लॉग में स्वागत है | साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी |

सदस्यता को इच्छुक मित्र यहाँ संपर्क करें या फिर इस ब्लॉग में प्रकाशित करवाने हेतु मेल करें:-
kavyasansaar@gmail.com
pradip_kumar110@yahoo.com

इस ब्लॉग से जुड़े

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

84 वें जन्मदिन पर 

कोई निशा अमावस सी थी 
कोई रात थी पूरनमासी 
जैसे तैसे ,एक-एक करके,
 कटे उमर के बरस तिर्यासी 

टेढ़ा मेढ़ा जीवन पथ था,
कई मोड़ थे ,चौड़े ,सकड़े 
मैंने पार किया सब रस्ता,
बस धीरज की उंगली पकड़े 
मिला साथ कितने अपनों का 
कई दोस्त तो दुश्मन भी थे 
कभी धूप, तूफान , बारिशे ,
तो बासंती मौसम भी थे 
महानगर की चमक दमक में
 भटका नहीं ग्राम का वासी
जैसे जैसे ,एक-एक करके 
कटे उमर के बरस तिर्यासी 

हंसते गाते बचपन बीता,
 बीती करते काम, जवानी 
अब निश्चिंत,जी रहे जीवन ,
आया बुढ़ापा, उम्र सुहानी 
बाकी ,कुछ ही दिन जीवन के 
उम्र जनित, पीड़ाएं सहते 
लिखा नियति का भोग रहे हैं 
फिर भी हम मुस्कुराते रहते 
जैसे भी कट जाए ,काट लो ,
भेद ये गहरा ,बात जरा सी 
जैसे तैसे, एक-एक करके 
कटे उम्र के बरस तिर्यासी 

मदन मोहन बाहेती घोटू 

5 टिप्‍पणियां:

कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।

हलचल अन्य ब्लोगों से 1-