बहुत तुम जुल्म ढाती हो
जो बोसा लूं,चुभे खंजर,
लूं चुम्बन काट खाती हो
जो मै लूं हाथ हाथों में,
मुझे नाख़ून चुभाती हो
जो फेरूँ हाथ जुल्फों पर ,
तो हेयरपिन मुझे चुभते,
बहुत तुम जुल्म ढाती हो,
जब मेरे पास आती हो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
माँ की याद
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*जब-जब हम सरसों का साग और मक्का की रोटी घर में बनाते हैं *
*जैसे बचपन को ,माँ की याद को शिद्दत से घर बुलाते हैं *
*साग पर पिघलता हुआ सफेद मक्खन ,*
*वो...
10 घंटे पहले